लखनऊ, 4 जुलाई। पृथ्वी विज्ञान को आमजन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारत के पहले पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव ‘पृथ्वी 2026’ की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में महोत्सव के आधिकारिक ब्रोशर का विमोचन किया। इस अवसर पर बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिनीता फर्त्याल तथा महोत्सव संयोजक डॉ. निमिष कपूर उपस्थित रहे।
23 से 25 जुलाई, 2026 तक लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) सभागार में आयोजित होने वाला यह महोत्सव भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया का अपनी तरह का पहला आयोजन होगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अधीन स्वायत्त संस्थान बीएसआईपी द्वारा आयोजित इस फिल्म महोत्सव का उद्देश्य विज्ञान, सिनेमा और समाज के बीच संवाद को मजबूत बनाना है।
दृश्य माध्यमों से आमजन तक पहुंचेगा पृथ्वी विज्ञान
‘पृथ्वी 2026’ का मूल विषय है— “दृश्य माध्यमों के जरिए पुराविज्ञान अनुसंधान एवं जनसहभागिता”। महोत्सव के माध्यम से पृथ्वी के करोड़ों वर्षों के इतिहास, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, भू-धरोहर, भू-पर्यटन और पर्यावरणीय सततता जैसे जटिल वैज्ञानिक विषयों को फिल्मों के जरिए सरल और प्रभावशाली ढंग से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच मौजूद दूरी को कम करना है, ताकि वैज्ञानिक जानकारी केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर आम नागरिकों तक भी पहुंचे।
सात श्रेणियों में होगी फिल्मों की प्रतियोगिता
महोत्सव में देशभर के वैज्ञानिक-फिल्मकारों, स्वतंत्र फिल्मकारों, विज्ञान संचारकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। प्रतियोगिता को सात प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें डॉक्यूमेंट्री, लघु फिल्म, एनीमेशन, विज्ञान कथा, जलवायु परिवर्तन, भू-धरोहर एवं भू-पर्यटन तथा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों द्वारा निर्मित विशेष श्रेणी शामिल हैं। सभी फिल्मों का विषय पृथ्वी विज्ञान, भूविज्ञान, पुराविज्ञान, वनस्पति विज्ञान और पर्यावरण से जुड़ा होगा।
राष्ट्रीय संवाद, मास्टरक्लास और विशेषज्ञों की मौजूदगी
फिल्म प्रदर्शन के साथ-साथ महोत्सव में “जनसहभागिता हेतु पृथ्वी विज्ञान संचार पर राष्ट्रीय संवाद” का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें देशभर के वैज्ञानिक, फिल्मकार, मीडिया विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता हिस्सा लेंगे। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चा, मास्टरक्लास, वैज्ञानिकों और आमजन के बीच संवाद तथा इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए जाएंगे।
शिक्षा और विज्ञान संचार को मिलेगा नया मंच
बीएसआईपी का मानना है कि महोत्सव में चयनित फिल्मों का उपयोग भविष्य में विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में शैक्षणिक संसाधन के रूप में किया जाएगा। इससे विज्ञान संचार को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने में मदद मिलेगी।
यह आयोजन भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। बीएसआईपी ने वैज्ञानिकों, फिल्मकारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों से इस ऐतिहासिक पहल में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
भारत का पहला पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव ‘पृथ्वी 2026’ 23 जुलाई से लखनऊ में, राज्यपाल ने किया आधिकारिक शुभारंभ
