वीबी-जी राम जी एक्ट 2026: यूपी में 125 दिन रोजगार, 300 रुपये मजदूरी

मनरेगा की जगह लागू हुआ वीबी-जी राम जी एक्ट, यूपी में 125 दिन रोजगार और 300 रुपये न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान
लखनऊ, 1 जुलाई। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) एक्ट लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राज्य में योजना लागू करने की तैयारियां पूरी होने की बात कही है।
करीब दो दशक तक ग्रामीण रोजगार की प्रमुख योजना रहे मनरेगा के स्थान पर लागू किए गए इस नए कानून के तहत रोजगार, विकास कार्यों की योजना और निगरानी के तरीके में कई बदलाव किए गए हैं।
125 दिन रोजगार, न्यूनतम 300 रुपये दैनिक मजदूरी
सरकारी जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था में पात्र ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। सरकार का दावा है कि राष्ट्रीय औसत मजदूरी भी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है।
सैटेलाइट डेटा और जीआईएस से बनेगी कार्ययोजना
नई व्यवस्था के तहत गांवों में विकास कार्यों की योजना सैटेलाइट डेटा, भूमि अभिलेख, जीआईएस मैपिंग और स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार की जाएगी। सरकार के अनुसार पहले जहां कार्यों का चयन स्थानीय मांग के आधार पर होता था, वहीं अब पूर्व निर्धारित विकास योजनाओं के अनुरूप परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी।
डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी
सरकार का कहना है कि विकास कार्यों की निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के माध्यम से की जाएगी। इससे कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
स्थायी परिसंपत्तियों पर रहेगा फोकस
सरकारी जानकारी के मुताबिक नई योजना में सड़क निर्माण, सिंचाई, जल संरक्षण और अन्य स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के समन्वय के माध्यम से संसाधनों के बेहतर उपयोग और परियोजनाओं के दोहराव को रोकने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, नई व्यवस्था के प्रभाव, क्रियान्वयन और ग्रामीण रोजगार पर इसके वास्तविक असर का आकलन योजना के लागू होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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